सच तो ये है की जनता की तो छोडिये , जनता से कटे इन मुट्ठी भर दलालों का गिरोह भी ये नहीं जानते होंगे कि पिछले राष्ट्रमंडल खेल कहाँ हुए थे . भारत में खेलों कि दुर्दशा के लिए जिम्मेदार इन मुट्ठी भर लालची लोगों को भारत कि आन -बान और शान से कोई लेना देना नहीं है वे इन खेलों के बहाने केवल अपनी जेबें भरना और गरीबों को दिल्ली से बेदखल करना चाहते है ताकि उनके आने वाले दिन ऐश भरे हो. अगर खेलों के बाद कोई बड़ा घोटाला सामने आये तो हमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए .
इस देश में खेलों के नाम पर बेतहाशा खर्चे होते है और उससे कोई भी समझदार और जिम्मेदार आदमी सकते में आ जायेगा . हमारे पूर्ववर्ती खेलमंत्री मणिशंकर अईयर के अनुसार पिछले मेलबौर्न खेलो में भारत को केवल ११ मिनट के प्रदर्शन के लिए १४ करोड रुपये खर्च करने पड़े . भारत की सांस्कृतिक पहचान बने हमारे फ़िल्मी सितारों ने अपनी देशभक्ति दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हमारी राष्ट्रीय सम्मान बनी अभिनेत्री ऐश्वर्य राय ने समारोह में शामिल होने के लिए और भारत के राष्ट्रध्वज के साथ ४ मिनट चलने के लिए खेल मंत्रालय से ४ करोड रुपये लिये . खैर उनकी तो डिमांड थी पैसों कि पर हमारी सरकार खेलों के मामले में इतनी उदार है कि सैफ अली खान को बिना मांगे ही ७५ लाख रुपये दे दिए गए .सरकारी लाव -लश्कर और उनके पूरे परिवार पर मंत्रालय का खर्चा हुआ सो अलग .हमारे इतने बड़े देश में ये खर्चे तो आम बात बन जाते है जिसकी कोई चर्चा भी नहीं होती .
इस मामले में राष्ट्रमंडल खेल थोडा अलग है . इस पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है , भारत में आजतक होने वाले किसी भी आयोज़न से कही अधिक .इसके बड़े और दीर्घकालिक सामाजिक परिणाम होने लाजिमी है. दुनिया में आजतक होने वाले खेल आयोज़न यही दिखाते है कि इन आयोज़नो से जनता का कभी कोई फायदा नहीं हुआ है. इस पर होने वाले खर्चों का क़र्ज़ जनता लंबे समय तक विभिन्न रूपों में चुकाती रही है . भारत में भी यही होने वाला है. ये लंबी चौड़ी सड़के और फ्लेट्स किसके लिये है जनता सब जानती है .७० हज़ार करोड का खर्च किसके पैसों से किसके मेहनत से और किसके लिये हो रहा है ये वक्त के साथ सबको पता चल जायेगा. ३५ हज़ार विस्थापित परिवारों को कोई देखने वाला नहीं है. कुछ हज़ार गरीब परिवार जो बड़ी दयनीय हालत में अपनी मजदूरी और मेहनत से इन आयोज़नो के लिये काम कर रहे है(इन्ही लोगो के कारण इस आयोज़न को जनता को रोज़गार देने वाला बताया जा रहा है)उन्हें सबसे पहले यहाँ से काम खत्म होते ही भगा दिया जायेगा ताकि उनकी छाया से ये आयोज़न कलुषित न हो जाएँ.
इस देश में जनता जहाँ अपनी कठिन जिंदगी को किसी तरह जी रही है , महंगाई और भ्रष्टाचार आतंकवाद के साथ मिलकर उसका जीना मुश्किल किये हुए है वही इन सबसे निश्चिन्त और आँखे मूंदीं सरकार इन आयोज़नो के माध्यम से केवल जनता का ध्यान देश कि असली समस्याओं से हटाना चाहती है जिसमे मिडिया सरकार के सहयोगी कि भूमिका निभा रही है.जनता की शिथिलता ,उसकी अज्ञानता और हम आप जैसे लोगों कि निष्क्रियता के कारण ऐसे आयोज़न आज तो सफल हो जायेंगे पर इसकी बहुत बड़ी कीमत आने वाला समय हमसे और हमारी आने वाली पीढ़ियों से वसूल करेगा.
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